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दंतेवाड़ा: नक्सलवाद के बाद क्या अब ‘पुलिसिया दमन’ का दौर? पत्रकार पर ही दर्ज हुई FIR, आक्रोश में मीडिया जगत

ByK Raghu Rao

Apr 3, 2026
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नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा में इन दिनों कानून व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मामला गीदम थाने से जुड़ा है, जहां सच दिखाने पहुंचे एक पत्रकार और उनके परिवार पर ही पुलिस द्वारा मामला दर्ज किए जाने का सनसनीखेज आरोप लगा है। इस घटना ने पूरे प्रदेश के पत्रकार संगठनों को लामबंद कर दिया है।

क्या है पूरा मामला?

बीती 14 जनवरी की रात गीदम थाने में कवरेज करने पहुंचे पत्रकार डीएम सोनी और उनके पुत्र के साथ कथित तौर पर कुछ रसूखदार लोगों ने अभद्र व्यवहार और मारपीट की। आरोप है कि भाजपा के कुछ स्थानीय पदाधिकारियों और अन्य प्रभावशाली लोगों ने थाना परिसर के भीतर ही पत्रकार को धमकी दी और उनके बेटे के साथ हाथापाई की।

स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई थी कि एसपी को अतिरिक्त बल (बटालियन) भेजकर हालात पर काबू पाना पड़ा। शुरुआत में पुलिस ने पत्रकार की शिकायत पर मामला दर्ज किया, लेकिन अब कहानी पूरी तरह पलटती नजर आ रही है।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि मामले को रफा-दफा करने के लिए उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था। जब पीड़िता मोनिका सोनी ने निष्पक्ष जांच के लिए केस को गीदम से दंतेवाड़ा थाना ट्रांसफर कराया, तब एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ। पता चला कि गीदम पुलिस ने घटना के दो महीने बाद आरोपी पक्ष के आवेदन पर उल्टा पत्रकार डीएम सोनी, उनके पुत्र और मोनिका सोनी के खिलाफ ही काउन्टर एफआईआर दर्ज कर दी है।

पत्रकार संघ ने दी प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

इस घटना से छत्तीसगढ़ श्रमजीवी पत्रकार संघ में भारी रोष है। जिला अध्यक्ष आजाद सक्सेना के नेतृत्व में पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने एसपी गौरव राय से मुलाकात की। संघ का कहना है कि:

  • पत्रकारों पर दर्ज “झूठी एफआईआर” को तुरंत निरस्त किया जाए।
  • दोषी थाना प्रभारी और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।
  • यदि जल्द न्याय नहीं मिला, तो पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन किया जाएगा।

एसपी का आश्वासन

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी गौरव राय ने स्वयं प्रकरण की बारीकी से जांच करने के आदेश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वर्दी और अधिकारों का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जांच के बाद जो भी दोषी होगा, उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

  1. क्या अब बस्तर में जमीनी हकीकत दिखाना पत्रकारों के लिए अपनी सुरक्षा और भविष्य दांव पर लगाने जैसा है?

फिलहाल, दंतेवाड़ा के पत्रकार जगत की नजरें अब एसपी की जांच और पुलिस के अगले कदम पर टिकी हैं।

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