छत्तीसगढ़ में बंगाली समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर चर्चा तेज हो गई है। समाज के बुद्धिजीवियों और कार्यकर्ताओं का कहना है कि वर्षों से शिक्षा, व्यापार, उद्योग और खनन क्षेत्रों में सक्रिय योगदान देने के बावजूद विधायक, सांसद और प्रदेश स्तर के पदों पर उनकी भागीदारी सीमित है।संगठनात्मक स्तर पर हजारों कार्यकर्ता सक्रिय होने के बावजूद शीर्ष नेतृत्व में पर्याप्त अवसर न मिलने को लेकर चिंता जताई गई है। समाज ने एकजुट मंच बनाकर सर्वदलीय संवाद, युवा नेतृत्व निर्माण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है।समाज का मानना है कि लोकतंत्र में समान भागीदारी और सम्मान सुनिश्चित होना चाहिए।
